जल्द सुलझ सकता सुशांत सिंह के मौत का सच AIIMS की जांच पूरी

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नई दिल्ली : एम्स ने सुशांत के पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विसरा की दोबारा जांच के बाद उस रिपोर्ट की शुरुआती स्टडी भी कर ली है. शुरुआती नतीजा एम्स की फॉरेंसिक टीम के पास है. लेकिन इस आखिरी नतीजे के बावजूद केस के आखिरी फैसले पर पहुंचने से पहले एम्स की फॉरेंसिक टीम सीबीआई की उस एसआईटी के साथ बातचीत करेगी. उन फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स से बातचीत करेगी, जिन्होंने सुशांत के घर पर डमी ट्रायल किया था. फॉरेंसिक रिपोर्ट और डमी ट्रायल की रिपोर्ट जब आपस में मैच कर जाएगी, उसके बाद ही सुशांत की मौत का सच बाहर आएगा.

एम्स की फॉरेसिक टीम ने दो तरह से फॉरेंसिक जांच की. एक पोस्टमार्टम रिपोर्ट दूसरी विसरा रिपोर्ट. पहले आपको बताते हैं कि फॉरेंसिक टीम ने विसरा रिपोर्ट की जांच कैसे की. एम्स फॉरेंसिक टीम को मुंबई के कलीना फॉरेंसिक लैब से सुशांत की विसरा के नमूने मिले थे. सूत्रों के मुताबिक सुशांत के इंटरनल बॉडी आर्गन यानी शरीर के अंदरुनी भाग के क़रीब आधा किलो नमूने रसायनिक परीक्षण के लिए इकट्ठा किए गए थे. इन नमूनों को तीन अलग-अलग शीशियों में रखा गया था.

इनमें से एक शीशी में पेट का हिस्सा था. छोटी आंत और बड़ी आंत. जबकि दूसरी शीशी में दिल, लीवर, किडनी, लंग्स के छोटे-छोटे टुकड़े गए थे. इसके अलावा तीसरी शीशी में खून के नमूने थे. खून के नमूने को छोड़ कर बाकी सारे नमूने और शरीर के अंदरुनी हिस्से नमक में घोल में रखे गए थे. उचित प्रीजर्वेटिव में. सुशांत के शरीर के अंदरुनी भाग के क़रीब आधा किलो इकट्ठा किए गए इन नमूनों में से एक तिहाई नमूने कलीना फॉरेंसिक लैब मुंबई में जांच में इस्तेमाल किए गए. बाकी बचे नमूने एम्स के फॉरेंसिक टीम के हिस्से में आए, जिनके ज़रिए रसायनिक परीक्षण किए गए. विसरा के इन रसायनिक परीक्षण के ज़रिए एम्स की फॉरेंसिक टीम ये पता लगा रही थी कि सुशांत को ज़हर तो नहीं दिया गया?

दरअसल, विसरा की जांच के ज़रिए अलग-अलग तरह के ज़हर और ड्रग्स के बारे में जानकारी इकट्ठा की जा रही थी. चूंकि ज़हर कई तरीक़े के होते हैं और ज़हर की मात्रा जांच में सबसे अहम होती है, इसीलिए विसरा की जांच में वक़्त लगता है. विसरा की जांच के ज़रिए एम्स फॉरेंसिक टीम ये जानना चाहती थी कि सुशांत के शरीर में अगर ज़हर है, तो फिर कौन सा है? विसरा की जांच के दौरान कुछ खास किस्म के ज़हर पर ज़्यादा ध्यान दिया जाता है. मसलन-

मैटेलिक प्वाइज़न  –  इसके ज़रिए ये देखा जाता है कि शरीर में आर्सेनिक, एल्यूमिनियम, ज़िंक वगैरह तो नहीं है.
वैजिटेबल प्वाइज़न  –  यानी धतूरा या कनेर तो नहीं.
सिंथेटिक ड्रग्स       –   मसलन एमडीएमए, कोकीन वगैरह.
कीटनाशक           –   जो फ़सलों पर कीड़ों को मारने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

विसरा की जांच में खास तौर पर इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि अगर कोई ज़हर है तो उसकी मात्रा कितनी है. ये मात्रा खुदकुशी और क़त्ल के बीच के फर्क को बहुत आसानी से साफ़ कर देती है. जैसे नमक निकोटीन यहां तक कि ऑक्सीजन की मात्रा भी तय से ज़्यादा हो तो ये ज़हर बन सकती है. तो कुल मिलाकर एम्स की फॉरेंसिक टीम विसरा की जांच के ज़रिए सिर्फ़ और सिर्फ़ ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सुशांत की मौत ज़हर से हुई है या नहीं.

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