दिल्ली में रहने के लिए क्या अब केजरीवाल से परमिट लेना होगा?

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 किसी भी समस्याओं के हल के लिए केजरीवाल सरकार की तैयारियां जमीन पर नही दिखती, लेकिन आम आदमी पार्टी इसके विपरीत जमीन पर कार्य करने की बजाय बयानबाज़ी में ज्यादा यकीन रखती है। आज पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने दिल्ली सरकार को नाकामी और अव्यवस्था को लेकर घेरते हुए कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा मास्क ना पहनने पर 500 रुपए का जुर्माना बढ़ाकर 2000 रुपए करने समस्या का हल नही बल्कि रिश्वतख़ोरी को बढ़ावा मिलेगा। इस तुगलकी फरमान से उन लोगों को ज्यादा परेशानी होगी जो मास्क खरीदने में भी असमर्थ हैं। इस अवसर पर प्रदेश मीडिया प्रमुख नवीन कुमार उपस्थित थे।
आदेश गुप्ता ने कहा कि एक तरफ़ फेल केजरीवाल सरकार ने बसों, तिपहिया, ग्रामीण सेवा, ई-रिक्शा इत्यादि मे फुल सवारियों की छूट दे रखी है वहीं दूसरी तरह सड़क पर पैदल चलने वालो से सोशल डिस्टेंसिंग के नाम पर 2000-2000 रुपए वसूली कर रही है। आख़री दिल्ली मे क्या कोई ग़रीब, व्यापारी या मध्यमवर्ग के लोग नहीं रह सकते? या दिल्ली मे रहने के लिए केजरीवाल से रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ेगा।
आदेश गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार के इस फैसले से तब फर्क पड़ता जब वह मार्केट एसोसिएशन, ट्रेडर्स एसोसिएशन, समाजसेवी संस्थाओं, सिविल डिफ़ेंस, आरडब्लूए एवं अन्य से कोरोना से बचाव के नियमों का पालन करवाने हेतु सहयोग करते। हर कोई कोरोना से बचना चाहता है, ऐसे में दिल्ली सरकार की नैतिक जिम्मेदारी थी कि वह लोगों को जागरूक करें लेकिन जागरूकता से ज्यादा प्राथमिकता उन्होंने खुद के प्रचार-प्रसार को दिया जिसका खामियाजा आज दिल्लीवासी कोरोना के बढ़ते मामलों के रूप में भुगत रहे हैं। जिन गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए 2 जून की रोटी जुटाना भी मुश्किल है वह मास्क के लिए 2000 रुपए का जुर्माना कैसे देंगे? क्या दिल्ली सरकार को कोरोना के मामलों की चिंता उस समय नहीं थी जब उन्होंने डीटीसी बसों को पूरी क्षमता के साथ चलाने की अनुमति दी, जहां भीड़ के कारण सोशल डिस्टेंसिंग का पालन बिल्कुल नहीं हो रहा है?
आदेश गुप्ता ने कहा कि समय रहते दिल्ली सरकार ने कोरोना से निपटने के लिए कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया और पिछले 8 महीनों के बाद दिल्ली सरकार की नींद खुली और उन्होंने सर्वदलीय बैठक बुलाई है और आनन-फानन में मास्क के लिए 2000 रुपए का जुर्माना कर दिया, जिसका कोई तर्क नहीं है। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट से निपटने के लिए दो बार मोदी सरकार के नेतृत्व में माननीय गृह मंत्री अमित शाह जी संकटमोचक बनकर आए और दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने की कमान अपने हाथ में संभाली। सुप्रीम कोर्ट से भी दिल्ली सरकार को ध्वस्त स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण दो बार फटकार लग चुकी है लेकिन दिल्ली सरकार का नकारात्मक रवैया बिल्कुल नहीं बदला। जब देश में कोरोना के मामले घट रहे हैं और दिल्ली में बढ़ रहे हैं ऐसे समय में दिल्ली सरकार को पूरी सक्रियता के साथ कोरोना से निपटने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। एकतरफा निर्णय जनहित की समस्याओं को हल नहीं करता है बल्कि उनकी परेशानियों को और बढ़ाता है। उन्होंने सवाल पूछा कि दिल्ली सरकार ने चालान काट कर जो 25 करोड़ रुपए इकट्ठा किया, क्या उसे भी अपने प्रचार में ही खर्च किये?
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार को भले ही उनकी जिम्मेदारियों का अहसास नहीं है लेकिन भारतीय जनता पार्टी दिल्ली प्रदेश सक्रिय होकर अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से उन गरीब और जरूरतमंद लोगों के बीच मास्क वितरित कर रही है जो मास्क खरीदने की क्षमता नहीं रखते हैं और उन्हें जागरूक कर रहे हैं। माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का संदेश ’जब तक दवाई नहीं तब तक ढिलाई नहीं’ को जन जन तक पहुंचाने के लिए भाजपा कार्यकर्ता सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए जागरूकता अभियान भी चला रहे हैं।

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